वैसे तो लिंग अनुपात की स्थिति पूरे देश मे ही खराब है लेकिन हरियाणा मे यह स्थिति बद से बदतर है ।इसी धटते लिगं अनुपात को लेकर वर्ष 2007 से समाज के विभिन्न वर्गो को इसके प्रति जागरूक करने का प्रयास शुरू किया ।इसी अभियान के तहत मै सैकड़ो गांव का दौरा कर चुकी हूँ ।स्कूल हो या कालेज,पंचायत हो या खाप पंचायत, महिला हो या पुरुष जंहा कही भी लोगो को इकट्ठा देखती हूँ वही लोगो को शपथ दिलाकर हस्ताक्षर करा कर जागरूक करने का प्रयास कर रही हूँ ।जब लोगो से विचार विमर्श किया तब बेटी पैदा न करने के मुख्य दो ही कारण सामने आए। पहला दहेज और दुसरा बेटियो की सुरक्षा ।बेटियां सभी माँ बाप की लाडली होती है लेकिन आज की महगाई मे उनको पढ़ा लिखा कर दहेज कहाँ से लाऐ और उनकी सुरक्षा केसै सुनिश्चित करे।इन्ही कारणो को मुख्य बिंदु बना कर लोगो को समझाने का प्रयास करती हूं कि जरा सोचिए कि क्या बेटियो के बिना इस सृष्टि की कल्पना की जा सकती है ? नही । मै आज बहुत खुश हूं क्योंकि मेरे इस अभियान को पूरा समर्थन मिल रहा है और हरियाणा कार लिगं अनुपात सुधर रहा है ।मै अब तक 50 हजार से अधिक हस्ताक्षर करवा कर इस अभियान से जोड़ चुकी हूँ । और यह अभियान उस आखिरी व्यक्ति तक जाएगा जो आज भी यह सोच रहा है कि बेटी तो पराया धन है उसे पैदा ही न किया जाए । डॉ सन्तोष दहिया , राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्व जातिय सर्व खाप महा-पचायत एवं प्रोफेसर कुरूक्षेत्र विश्वविध्यालय हरियाणा ।

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