Khap 8हमारा देश विविधताओ का देश है जिसमें अनेक धर्म और जातियों के लोग मिल जुलकर कर रहते हैं। उत्तरी भारत में खाप पंचायत लोकतंत्र का एक ऐसा ढाँचा हैं जिससे हर व्यक्ति जुड़ा हुआ है। 1355 ई . में खाप पंचायतों में महिलायें होती थी ।दादी भागीरथी देवी उस समय की महिला अध्यक्ष थी । लेकिन उसके बाद हम ग़ुलामी के दौर से गुज़रे। ग़ुलामी का दौर बड़ा भयावह होता है जहाँ कुछ भी सुरक्षित नही रहता। ऐसे हालात में लोगों ने अपनी बहु बेटियों का घर से बाहर निकलना लगभग बन्द कर दिया था इसीलिए महिलाओं का खाप चबूतरों पर जाना बंद हो गया था और खाप पंचायतें भी महिलाओं की उपस्थिति के बिना काम करने लगी लेकिन ऐसा संगठन जो समाज हित में काम कर रहा हो और उसमे जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत, जो कि महिलायें हैं, की भागीदारी भी ना हो तो ये उचित नहीं हैं। इसी के चलते मैंने खाप पंचायती में जाना शुरू कर दिया।
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खाप पंचायतों की कार्य प्रणाली मुझे बचपन से ही प्रभावित करती आ रही थी ।जहाँ दोनो पक्षों को इत्मिनान से सुना जाता हैं और पैसे, वक़ील और पुलिस प्रशासन के न होते हुए भी दोनो पक्षों की सहमति से फ़ैसले किए जोतें हैं । मैं इसे अपना सुभगा मानती हूँ कि खाप पंचायतो का हिस्सा बनी। क्योकि जिन खाप चबूतरों पर महिलाओं को चढ़ने की इजाज़त भी नहीं थी मुझे उन्ही खाप चबूतरों की 2 मई 2010 को सर्व जातीय सर्व खाप महा पंचायत की पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल हुआ। आज पूरे उत्तरी भारत की खाप चबूतरों की चौधर बड़ी शिद्दत के साथ मुझे सुनती हैं और उनके फ़ैसलों पर मेरी मोहर लगनी ज़रूरी हो गयी है ।आज मैं महिलाओं की पैरोकार बनकर उनकी दमदार आवाज़ बन चुकी हूँ और मै समाज को यह बताने में कामयाब हो गई हूँ कि आधुनिक बेटी को समाज से क्या क्या उम्मीदे हैं और इन बेटियों की उम्मीदों को चौधरियों तक पहुँचा दिया हैं । और खाप चौधरियों ने भी उन पर मोहर लगा दी ।बेटियों की उम्मीदों पर खरी उतरने से बड़ी बात मेरे लिए क्या हो सकती हैं। क्योंकि मैं ये बख़ूबी जानती हूँ की power comes from sincere services. क्योंकि कर्म से ही राजा बने कर्म से बने फ़क़ीर, कर्म करे तो ऐसा कर जिसकी पिटे लोग लकीर ।