15 अगस्त 2015 स्वतंत्रता दिवस मेरे लिए ख़ास था ।एक ओर पूरा देश आज़ादी का जश्न माना रहा था वही मै हिसार जिले के गांव मुज़ादपुर को गोद ले रही थी। मुज़ादपुर गाँव मे 1००० लड़कों के पीछे सिर्फ़ 273 लड़कियाँ हैं जो कि हरियाणा का सबसे ख़राब लिंगनुपात है ।मैं वहा जाकर एक अलग तरह की सोच से अवगत हुई। बेटियां कम होने का जो कारण बताया वो बिलकुल चौंकाने वाला था। उन्होंने बताया की यहाँ बेटियाँ इसलिए कम है क्योंकि हमारे गाँव में जिस व्यक्ति के पास 5 एकड ज़मीन से कम ज़मीन हैं उनके बच्चो का रिश्ता नही हो रहा है इसलिए पहला बच्चा अगर बेटा हो जाता है तो दूसरा बच्चा ही नही करते है। मैंने उन्हे समझाया कि आप अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा दो ।अगर वो पढ़ेंगे लिखेंगे तो उनको कही ना कही कोई नौकरी मिल ही जाएगी और अगर ना भी मिली तो भी पढ़ लिख कर वह कोई अपना काम कर सकता है। मेरी कोशिश है कि आने वाले समय में मुज़ादपुर गाँव का लिंगानुपात सुधर जाए क्योंकि हमारा क़रार यह होना चाहते कि हम टूटी फूटी नहीं बल्कि एक सुन्दर दुनिया छोड़ के जाए और इसके लिए हम सभी को प्रयास करना होगा क्योंकि कहते है कि मंज़िल मील ही जाएगी भटकते ही सही, गुमराह तो वो होते है जो घर से निकलते ही नहीं ..।
डॉ सन्तोष दहिया, राष्ट्रीय अध्यक्षा, अखिल भारतीय महिला शक्ति मंच।

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