मुश्किल दौर में धैर्य को बनाए रखना और कामयाबी के झंडे गाड़ना कोई प्रोफेसर डॉ. संतोष दहिया से सीखे। उन्होंने बचपन से ही लड़का-लड़की में किए जाने वाले भेदभाव का पुरजोर विरोध किया। लिंगभेद के लिए बदनाम हरियाणा की इस बेटी ने ना केवल खेल और शिक्षा के क्षेत्र में अपने आपको साबित किया बल्कि पुरुषों के वर्चस्व वाली पंचायतों में भी महिलाओं को बराबर का प्रतिनिधित्व दिलवाया। प्रत्येक बाधा को अपने हौसले से पस्त कर वे आज भी महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए संघर्षरत हैं।
नारी के त्याग तपस्या का इस जग में कोई हिसाब नहीं।
उसके असंख्य उपकारों का धरती पर कोई जवाब नहीं।
आजीवन ही जगजीवन को ममता का कवच सौपती जो
उस परमपूज्य नारी मन की सृष्टी में कोई मिसाल नहीं।
स्कूल में
पढ़ने के लिए जाने से पहले घर का सारा काम करना, पशुओं का चारा-पानी और साफ़-सफाई करना, गोबर के उपले बनाना, कुएं से सिर पर पानी लाना, खेत में काम करना, शाम में स्कूल से आने के बाद पशुओं को जोहड़ से पानी पिलाकर भी लाना आदि-आदि।
संतोष दहिया के बचपन में रोजमर्रा की यही दिनचर्या थी। लेकिन बचपन से ही साहसी संतोष इस सारे काम को भी इतने मन से करतीं थीं कि उन्होंने इन कामों को हुनर तराशने की ज़रिया बना लिया। जैसे गांव के जोहड़ में पशु को नहलाते-नहलाते उनकी पूंछ पकड़ कर तैरना सीख लिया और प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ तैराक चुनी गई। इसके अलावा वॉलीबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले संतोष दहिया आज आज एशियन वूमैन बॉक्सिंग कमीशन की सदस्य भी हैं।

तत्कालीन रोहतक जिले के गांव डीघल में श्रीमति संतरा देवी एवं श्री चंद्रभान अहलावत के घर में संतोष का जन्म हुआ। भाई राजबीर और बहन राजबाला से छोटी संतोष भाई कुलदीप और बहन आशा रानी से बड़ी हैं। गांव के राजकीय विद्यालय से प्राथमिकी और माध्यमिकी शिक्षा ग्रहण करने के बाद संतोष ने सोनीपत के भगत फूल सिंह मेमोरियल महिला कॉलेज से बारहवीं की। वर्ष 1987 में राजकीय महाविद्यालय गुड़गांव से बीए किया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमए करने के बाद उन्होंने 1990 में पंजाब के पटियाला में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से वॉलीबॉल में डिप्लोमा किया।
जनवरी 1990 में उनका
विवाह सोनीपत के गांव रोहणा निवासी बिजेंद्र दहिया के साथ हो गया। बीई और एमटेक करने वाले इंजीनियर बिजेंद्र उस समय कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अनुभाग अधिकारी के पद पर नियुक्त थे। इसी वर्ष के अंत में दोनों के घर में बेटी सुगंधा और अक्तूबर 1992 में बेटे शुभम का जन्म हुआ। वर्ष 1992 में ही उनका चयन हरियाणा सरकार ने स्पोर्ट्स कोच के रूप में कर लिया। जबकि 1996 में सोनीपत के टीकाराम गर्ल्स कॉलेज में वे बतौर लेक्चरार नियुक्त हुई। इसके बाद उन्होंने 1998 में करनाल के डीएवी कॉलेज में पढ़ाना शुरू कर दिया।

वर्ष 2003 से वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। इसी वर्ष उन्होंने शारीरिक शिक्षा में पीएचडी की डिग्री भी हासिल कर ली। शिक्षण के साथ उनकी सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी बढ़ गई। खुद स्वावलंबी होने के साथ दूसरों का संबल बनने लगी। वे कहती हैं- महिला कमजोर नही है। हर महिलाओं में यह ताकत है, लेकिन जरूरत है अपनी ताकत की पहचान करने की। डॉ. संतोष दहिया कहती हैं कि महिलाएं आज किसी से कमतर नहीं है, वह सशक्त है और उन्हें देखकर मुझे लगता है यदि इसी तरह महिलाएं सशक्त हो गई तो वह दिन दूर नहीं जब रुढ़िवादियों को खत्म कर हम एक नए सवेरे का निर्माण करेंगे। नारी शक्ति से बड़ी दुनिया में कोई ताकत नहीं।
नारी जननी है।
वर्ष 1987 में एक खेल प्रतियोगिता के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने बेस्ट पुरुष वॉलीबॉल प्लेयर को 500 रुपए परितोषिक दिया और बेस्ट महिला वॉलीबॉल प्लेयर के रूप में संतोष को 200 रुपए परितोषिक दिया तो उसने मीडिया के सामने रोष प्रकट किया। जिसकी जानकारी मिलते ही ताऊ देवीलाल ने उन्हें स्टेज पर बुलाया और 500 रुपए बतौर प्रोत्साहन राशि भेंट करते हुए आशीर्वाद दिया।
वर्ष 1982 में जब गांव डीघल में एक व्यक्ति शराब के नशे में अपनी पत्नी को पीट रहा था तो ये संतोष से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने शराबी के हाथ से डंडा छीना और उसे ही पीट दिया। एक 12 साल की बच्ची की ये हिम्मत देख मूकदर्शक बने ग्रामीण हक्के-बक्के रह गए थे।

1982 में 4 स्वर्ण पदकों के साथ हरियाणा की बेस्ट स्वीमर चुनी गई।
1982 में आल इंडिया क्रॉस कंट्री 3000 मीटर दौड़ में 8वां स्थान प्राप्त किया।
1987 में प्रदेश के बेस्ट वॉलीबॉल प्लेयर चुनी गई।
1988 में नॉर्थ इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में बेस्ट वॉलीबॉल स्पाइकर चुनी गई।

खेल एवं दूसरे आयोजनों के दौरान बेटी बचाओ अभियान के तहत वे अब तक 50 हजार से अधिक हस्ताक्षर करवा चुकी हैं। विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में अब तक एक लाख से अधिक लोगों को कन्या सुरक्षा की शपथ दिलवा चुकी हैं। आॅनर किलिंग को लेकर लोगों को जागरूक करती हैं, क्योंकि संतोष दहिया का मानना है कि सभ्य समाज में ऐसे अमानवीय अपराधों के लिए कोई स्थान नहीं है। यह आवाज़ वह खाप के चबूतरे से भी मजबूत पैरोकारी के साथ उठाती हैं। उजड़ने के कगार पर पहुंच चुकी अनेक गृहस्थियों को अपनी सकारात्मक पहल से बसाया। घरेलू हिंसा के सैकड़ों मामलों में मध्यस्थ बनकर आपसी सहमति और प्रशासनिक सहयोग से उनका निपटारा करवा चुकी हैं।
पर्दा प्रथा के विरुद्ध 30
अप्रैल 2014 को कुरुक्षेत्र के पीपली गांव से “हमारा बाणा, पर्दामुक्त हरयाणा” अभियान चलाया और आज यह इलाका पूरी तरह पर्दा मुक्त हो चुका है। पिछले एक दशक से दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अनवरत जागरूकता अभियान चलाए हुए हैं।
चुनाव के वक्त बांटे जाने शराब और पैसे के विरुद्ध डॉक्टर संतोष दहिया ने लोकसभा इलेक्शन 2014 में “मूसल-बेलन ब्रिगेड बनाई” जिसने परिवर्तन का काम किया और चुनाव में शराब के प्रलोभन के ख़िलाफ़ माहौल तैयार हुआ।
प्रदेश के सबसे निम्न (273/1000) लिंगानुपात वाले हिसार के गांव मुजादपुर को गोद लिया और वहां ग्रामीणों के साथ मिलकर इस स्थिति को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर काम किए।
वर्ष 2010 में कुरुक्षेत्र में आयोजित के पंचायत में
पहली बार पहुंची संतोष दहिया ने बेबाक तरीके से अपना पक्ष रखा। जिसकी खाप प्रतिनिधियों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा भी की। इसके बाद 2 मई 2010 को पाई में आयोजित सर्वजातीय सर्वखप महापंचायत में उन्हें महिला विंग का अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
सैकड़ों पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली संतोष दहिया ने ऑनर किलिंग से लेकर महिला उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। वर्ष 2012 में उन्होंने अखिल भारतीय महिला शक्ति मंच का गठन किया और लगातार नारी समाज की आवाज बनी हुई हैं।
- प्रोफेसर डॉ. संतोष दहिया को वूमेन इन पब्लिक लाइफ श्रेणी में देश की सशक्त महिला के रूप में चुना गया है। राष्ट्रपति भवन में 22 जनवरी को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। हरियाणा में महिला सशक्तिकरण की पहचान बनी डॉ. संतोष दहिया को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से देश की 250 महिलाओं में से 100 महिलाओं को वोटिंग के माध्यम से चुना गया।

- वर्ष 2015 में दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने हक एक्सप्रेस अवार्ड से सम्मानित किया।
- वर्ष 2015 में हिमाचल के राज्यपाल देवव्रत आचार्य ने सम्मानित किया।
- वर्ष 2015 में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह ने जात महान अवार्ड से नवाजा।
- वर्ष 2015 में हरियाणा सरकार की मंत्री कविता जैन ने सम्मानित किया।
- वर्ष 2013 में गुड़गांव में आयोजित कार्यक्रम में स्त्री सम्मान से नवाजा गया।
- वर्ष 2012 में राजस्थान के मंत्री बिजेंद्र ओला ने भारतीय वीरता पुरस्कार दिया।
- वर्ष 2012 में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रेम धूमल ने किया सम्मानित।