कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ. संतोष अहलावत दहिया का शनिवार को उनके पैतृक गांव डीघल में अभिनंदन किया गया। विदित है कि डॉ. संतोष दहिया को उनके द्वारा किए जा रहे महिला सशक्तिकरण के कार्यों के लिए राष्ट्रपति ने इसी वर्ष की शुरुआत में सम्मानित किया था। युवाओं ने उन्हें सहयोग राशि देकर प्रोत्साहित किया तो महिलाओं ने चुन्नी भेंट कर महिला सशक्तिकरण को समर्पित गांव डीघल की बेटी संतोष के साहस एवं संघर्ष की प्रशंसा करते हुए कहा कि संतोष तो संघर्ष का प्रतीक है।
महिला उत्थान के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए राष्ट्रपति से अवार्ड प्राप्त डॉ. संतोष दहिया को शनिवार को अपने पैतृक गांव में भी सम्मानित किया गया। समाज को करीब 13 वर्षों से बेटियों के प्रति जागरूक करने में जुटी डॉ. संतोष महिलाओं से संबंधित घरेलू झगड़ों के निपटारे के लिए भी हमेशा तैयार रहती हैं। महिलाओं के हक के लिए अनेक मंचों पर प्रभावशाली तरीके से आवाज उठा चुकी संतोष ने लिंगानुपात के मामले में हरियाणा के सबसे पिछड़ा गांव माने जाने वाले हिसार के गांव मुज़ादपुर को भी गोद लेकर वहां जागरूकता फैलाई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. संतोष ने कहा कि महिलाएं जिस भी क्षेत्र से जुड़ी हैं, उस क्षेत्र में पूर्णता नजर आती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार से महिलाओं की भूमिका हटा दी जाए तो परिवार का अस्तित्व ही नहीं बचता। अभावों के बावजूद महिलाएं परिवार को एकजुट रखने में सक्षम होती हैं। नारी परिवार को एक बगिया की तरह सुंदर बनाती है। नारी के बिना एक आदर्श एवं संस्कारित परिवार और समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। महिलाएं समाज का आधार हैं। एक समृद्ध राष्ट्र कि कल्पना तभी की जा सकती है जब वहां की महिलाएं शिक्षित हों। उन्होंने दोहराया कि महिला सशक्तिकरण के सब नारे तभी सफल होंगे जब महिलाएं जागरूक होंगी। आज भी हर तरफ महिलाओं पर हो रहें अत्याचार, जुर्म व भेद-भाव की खबरें सामने आ रही हैं। जब समाज की उत्पत्ति में दोनों का बराबर योगदान है तो इसके निर्माण में भी दोनों को समानांतर सहयोगी की भूमिका निभानी होगी। इस मौके पर मांगे राम पूर्व सरपंच, शेर सिंह, बलजीत, ईश्वर पहलवान, सत्यवान, रणधीर, रोशनी, मंजू, विद्या, सुनीता, अंजू, रामफल, कमला, नंबरदार कपूर सिंह, राजबाला, नीलम, बिमला आदि उपस्थित थे।

Add Comment